“कहने भर को आज़ाद है”

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Written By.: Arpita Singhaniya

“कहने भर को आज़ाद है”

कहने को तो हम पिछले सत्तर बरस से आज़ाद है,

पर असली आज़ादी अभी मिलनी बाकी थी,

आज़ादी प्यार करने की, आज़ादी जैसे है वैसे बने रहने की।

अदालत में समाज से खुद के लिए, लड़ाई जारी थी।

वो दिन भी आ गया, जब निर्णय होना था,

निर्णय की हम प्यार कर सकते है या नही?

लड़के का लिपस्टिक लगाना गलत है या सही?

लड़कियों का बाइक चलाना कही गलत तो नही?

लड़की होकर लड़की से प्यार करे, क्या है ये एक बिमारी?

लड़के को लड़का भाए, ये गुनाह तो नही?

एक इंसान का दिल औरत और मर्द दोनो पर आ जाए, कही कुदरत के खिलाफ़ तो नही?

इन सारे सवालो के जवाब हमे आज मिलने वाले है,

आज दिन-गुरुवार, दिनांक- ६, वर्ष-2018 और सितंबर का महीना है,

कहते है सितंबर का महीना अपनी ऊर्जा को फिर से केंद्रित करने का महीना होता है,

सही है, हमें आज इसकी ही तो ज़रूरत है, क्योंकि,

इतने सालों की मेहनत शायद आज रंग लाने वाली है,

कौम के सारे लोग उम्मीदों से भरे टी.वी. से चिपके हुए है,

कुछ ने तो जश्न की तैयारियां भी शुरू कर दी है,

मानो उन्हें पहले से ही पता हो कि जीत हमारी होने वाली है,

और जैसा की उम्मीद थी जीत हमारी ही हुई,

ऐसे लगा मानो हमे नई ज़िन्दगी नसीब हुई है,

सारी दुआ अल्लाह ने आज कबुली है,

खुद भगवान ने हमे जीत की दुहाई दी है।

इतनी खुशिया एक साथ पहले देखी नही थी हमने,

हम जीत में मदहोश आने वाले तूफ़ान को भाप नही पाए थे,

क्योंकि अगले ही पल जो शब्द कानो से टकराए वे कुछ युं थे-

सुना है फैसला सुना दिया है अदालत ने,

फरमान भी जारी कर दिया है सरकारी दफ्तरों में,

कि हमें अब कोई क़ैद नही कर सकता,

कि एक इंसा का दूसरे इंसा से प्यार नही है कोई गुनाह,

पर सवाल तो अब भी वही है मेरा, की क्या इससे कोई फ़र्क पड़ेगा?

क्योंकि समाज ने भावनाओं को हमेशा तर्क की तराजू में है तौला,

समाज की सोच तो अब भी क़ैद है, उसे कौन आज़ाद करेगा?

कह दो ना उसी अदालत से उनकी भी सुनवाई जल्द कर दे,

और आज़ाद कर दे उन्हें भी उनकी कुंठित सोच से।

ये सुन लगा मानो किसी ने हसीन सपना देखते हुए ग़हरी निद्रा भंग कर दी हो,

उसके शब्द कानों में ज़हर की तरह घुल रहे थे,

वास्तविकता की सही तस्वीर से जो रूबरू हुए थे,

उस वक़्त ऐसा लगा, जैसे हम किसी समुद्र में कूद गए है,

तैरना तो नही आता था, इसलिए डूब ही रहे है,

पर कम्बख्त हमसे तो यमराज भी रूठे हुए है।

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